Mon10232017

Last updateThu, 10 Aug 2017 9am

Read The Untold Inside Story of Communist Leaders of India!

Read The Untold Inside Story

Haven’t you noticed that all of the top communist leaders came from upper classes of their societies and from wealthy families?

Lenin was from the nobility (his father was awarded the Order of St. Vladmir and his mother was quite rich).

Karl Marx came from a fairly rich family that owned a lot of land. His nephews founded the famous company – Philips.

Heinrich Marx, his father was a famous lawyer and Karl’s uncle was a very wealthy industrialist.

Fidel Castro’s father was a rich sugarcane farmer in Cuba.

Che Guevara’s mother was also from a famous noble family in Latin America. Che spent most of his childhood as a member of the upper class Argentinian society.

Mao Zedong’s father was among the richest farmers of Shaoshan province.

Read more...

आखिर कब तक करदाता ढोयेगा राहुल और प्रियंका गाँधी परिवार की प्रधानमंत्री स्तर की एस.पी.जी सुरक्षा का खर्चा?

आखर कब तक करदत ढयग

 कुछ माह पहले राजधानी के आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष भट्टाचार्य की एक आरटीआई का जो जवाब भारत सरकार ने दिया से पता चला कि प्रियंका गांधी को लुटियन दिल्ली के 35 लोधी एस्टेट के शानदार बंगले का मासिक किराया मात्र 8,888 रुपये ही देना पड़ता है। यह छह कमरे और दो बड़े हालों का विशाल बंगला है। कई एकड़ में फैला है। ऊंची दीवारें हैं। जगह-जगह सुरक्षा पोस्ट बने हुए हैं। सुरक्षा प्रहरी २४ घंटे तैनात रहते हैं। यह भी ठीक है कि उनकी भी सुरक्षा अहम है। वे कम से कम नेहरु-गाँधी परिवार की वंशज तो हैं ही। पर उनसे इतना कम किराया क्यों लिया जा रहा है? इतने कम किराए पर राजधानी में एक कमरे का फ्लैट मिलना भी कठिन है। और जब प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा का अपना सैंकड़ों करोड़ का लंबा-चौड़ा कारोबार है। वे स्वयं सक्षम हैं, तो फिर उनसे इतना कम किराया सरकार क्यों लेती है। जाहिर है, देश की जनता को इस सवाल का जवाब तो चाहिए ही। और, क्या प्रियंका गांधी को लगभग मुफ्त में लुटियन जोन के बंगले में रहने की मांग करना स्वयं में शोभा देता है? इस देश में बाकी पूर्व प्रधानमंत्रियों के परिवार भी तो हैं। उन्हें तो इस तरह की कोई सुविधाएं नहीं मिलतीं, शायद वे इतनी बेरहमी से ऐसी मांग भी रखने में हिचकते होंगे? प्रियंका तो सांसद या विधायक क्या वार्ड पार्षद तक भी तो नहीं हैं।

और इससे ठीक विपरीत उदाहरण भी सुन लें। अभी हाल ही में भूतपूर्व प्रधानमंत्री पी. वी.नरसिंह राव के पुत्र पी. वी. राजेश्वर राव के निधन का एक छोटा सा समाचार छपा था। वे 70 वर्ष के थे। श्री राव कांग्रेस के पूर्व सांसद भी थे और उन्होंने तेलंगाना में कुछ शिक्षा संस्थानों की शुरुआत भी की थी। उन्हें कभी कोई स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप से सुरक्षा नहीं मिली। उनके बाकी भाई-बहनों को भी कभी एसपीजी सुरक्षा नहीं प्राप्त हुई। वे लगभग अनाम-अज्ञात इस संसार से कूच कर गए। राव की तरह से बाकी भूतपूर्व प्रधानमंत्रियों के परिवार के सदस्य भी सामान्य नागरिक की तरह से ही जीवन बिता रहे हैं। इनमें पत्नी और बच्चे शमिल हैं। डा. मनमोहन सिंह की एक पुत्री डा. उपिन्दर सिंह, दिल्ली यूनिवर्सिटी में इतिहास पढ़ाती हैं, सामान्य अध्यापकों की तरह। वह पहले सेंट स्टीफंस कालेज से भी जुड़ी थीं। चंद्रशेखर जी के दोनों पुत्र भी बिना किसी खास सुरक्षा व्यवस्था के जीवनयापन कर रहे हैं। एक पुत्र नीरज शेखर तो अभी भी सांसद हैं। यहां तक कि वर्तमान प्रघानमंत्री का पूरा परिवार भी आम नागरिक की जिंदगी जी रहा है। पर राजीव गांधी के परिवार पर रोज करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। क्योंकि वे एसपीजी के सुरक्षा कवर में रहते हैं। क्या बाकी प्रधानमंत्रियों के परिवार के सदस्यों की जान को किसी से कोई खतरा नहीं है? क्या वे पूरी तरह से सुरक्षित हैं? 

Read more...

Hindu Political Thought: Liberal, Conservative and Reactionary

Hindu Political Thought

This essay is intended to provide a theoretical introduction to the three varieties of political thought that have emerged among the Hindus in modern times. The circumstances of modernity naturally give rise to these three, as well as other forms of political discourse, all of which are traceable to a Western past. But the fact that modernity originated in the West and was transported to India, and that too under colonial conditions, problematizes in the Indian context, the relevance of the Indian past, which is usually designated as Hindu. In case of the West, modernity is a transformation of its own past and in that sense its past survives, albeit in an altered shape, into modernity. On the other hand, in case of India because modernity is a foreign import one is confronted by the issue of the abandonment of its past.

To this, one group responds in the affirmative and insists on a new beginning from the clean slate of the Indian independence movement. This group, who we might call the Indian liberals, usually identified as purveyors of the ‘Idea of India,’ see no special value in the Hindu past. It is just another stream of thought, parallel to the world-views held by Muslims, Christians, Buddhists, Jains, Sikhs, Dalits and so on; at worse, it is a threat given its power and influence over the majority of Indians. The group opposing the Indian liberals invest considerable value in the Hindu past and hold that Indian modernity should organically develop from it just as Western modernity emerged from its own past. It is this group who is of interest in this essay and we explore the three ways in which they seek to engage with the Hindu past – the liberal, the conservative and the reactionary – from the perspective of modernity. Inasmuch as an interest in the past is a characteristic of right-wing thought, one could even say that these are the three strands of Indian right-wing intellectualism.

Read more...

Congress was never National

 Congress was never

The Congress party that was founded by an Englishman may be ended by an Italian woman. It has always looked to foreigners and foreign sources for inspiration. Recent election results show that this ploy of projecting foreign faced exhibits in the name of ‘charisma’ may no longer be working.

Read more...