Fri07212017

Last updateFri, 23 Jun 2017 9am

केजरीवाल की ध्‍यान बटोरने वाली पोलिटिक्‍स और न्‍यूज चैनलों के तमाशे की भेंट चढ़ गया गजेंद्र!

कजरवल क ध-यन बटरन  2

तय मानिए कि दौसा निवासी गजेंद्र की मौत भी दब जाएगी। टीवी कैमरे के दम पर खड़ी हुई एक तमाशा पार्टी और उसे तमाशा बनाकर पेश करने वाली मीडिया, दोनों इस साजिश में शामिल हैं। मैंने जब केजरीवाल पर 'सच्‍चाई या साजिश' पुस्‍तक लिखी थी तो कुछ पत्रकार मेरी खुलकर आलोचना कर रहे थे कि तुम केजरीवाल से व्‍यक्तिगत दुश्‍मनी निकाल रहे हो। अनशन के दौरान अन्‍ना हजारे को डॉक्‍टरों ने ड्रिप लगाया और केजरी-सिसोदिया ने इसे तमाशे बक्‍से को ब्रेक कर दिया, परिणाम ड्रिप खींच लिया गया। तो यह बताने में आखिर मेरा व्‍यक्तिगत स्‍वार्थ क्‍या है? उन पत्रकारों को चाहिए कि खुलकर आपा का प्रवक्‍ता बनते हुए मुझ पर मुकदमा दर्ज करा दें!

मैं नेशनलदुनिया अखबार में था, एक केजरीवाल के मित्र बदलानी नामक आरटीआई कार्यकर्ता की हत्‍या हो गई थी, लेकिन आआपा और मीडिया ने इसे दुर्घटना बताया था। तीन-चार दिन तक जब मैं इसे हत्‍या साबित करने में जुटा था तो ऐसे ही कुछ तथाकथित पत्रकारों ने कहा था, तुम्‍हें उसकी बड़ी फिक्र है? बंद करो

मैंने अपनी आंखों से देखा है कि शॉट बनाने के लिए टीवी कैमरामैन आग लगवाने का खेल करते हैं! यह खेल भी यही था! आज कल बैंकॉक से आए मुर्गे से लेकर पटपड़ गंज के एनजीओ वाले चपरगंजू तक को किसान नेता बनने का भूत सवार है, क्‍योकि देश को गुमराह कर अपनी जमीन जो तैयार करनी है!

एक साल होने को आए, लेकिन केंद्र में भ्रष्‍टाचार नहीं हुआ है तो फिर परसेप्‍शन की लड़ाई शुरू हो चुकी है कि मोदी सरकार को कॉरपोरेट समर्थक बताओ, भले ही आदित्‍य बिड़ला को कौडि़यों के दाम मनमोहन सिंह ने कोयला खदान दिया हो, भले ही बिड़ला ने अपने बचाव में TV Today (आजतक न्‍यूज चैनल) का एक चौथाई शेयर खरीद लिया हो! भले ही नवीन जिंदल ने फ्री में कोयला खदान हासिल किया हो और बचाव में फोकस टीवी खड़ा किया हो! भले ही 2जी में रतन टाटा बदनाम हुए हों और अन्‍ना आंदोलन को कवर करने के लिए चैनल्‍स को 12 हजार करोड़ का विज्ञापन जारी किया हो! भले ही अनिल अंबानी को 2G में फायदा पहुंचा हो और वह TV Today के शेयर खरीदने में सफल रहा हो, भले ही केजी बेसिन गैस मामले मेूं मुकेश अंबानी को लाभ दिया गया हो, उसके कहने पर पूर्व पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेडडी को हटाया गया हो और वह आईबीएन ग्रुप को खरीदने में सफल रहा हो! --- लेकिन कारपोरेट समर्थक और सूटबूट वाली तो 10 महीने पहले वाली मोदी सरकार है। 10 साल वाली सरकार तो बिडला, अंबानी, टाटा, जिंदल जैसे भिखमंगों को भोजन का अधिकार देने की लड़ाई लड रही थी!

अब जब सभी किसान हितैषी बनने की जुगत में हो तो सबसे बड़ा किसान हितैषी कौन? फिर शुरू हुआ तमाशा रचने का खेल! जब तमाशा के बल पर लोकपाल आंदोलन और आआपा पार्टी खडी की जा सकती है तो किसान नेता क्‍यों नहीं बना जा सकता?

आत्‍महत्‍या के तमाशे की पटकथा लिखी गई। राइटर आआपा के बड़े नेता थे और डायरेक्‍टर नीचे कैमरे के साथ चौथे खंभे वाले! लेकिन स्क्रिप्‍ट में आत्‍महत्‍या होनी नहीं थी, लेकिन वह एक्सिडेंटल हो गई! क्‍लाइमेक्‍स में गजेंद्र को मंच पर बुलाकर PMO India मोदी को गाली दिलवाना था, लेकिन क्‍लाइमेक्‍स में अचानक की दुर्घटना ने ऐसा हस्‍तक्षेप किया कि तमाशा गढने और तमाशा दिखाने वाले, दोनों पर भारी पड़ गया!

लेकिन नहीं, फिल्‍म अभी बांकी है मेरे दोस्‍त! एक दिन बाद ही, मोदी सरकार को गरियाने का सिलसिला फिर शुरू होगा, आखिर गजेंद्र के आत्‍महत्‍या की मिलीजुली पटकथा लिखी तो इसके लिए ही गई थी! तमाशा करने और तमाशा बनाने वाले यदि चुप रहे तो फिर देश को नया किसान नेता कैसे मिलेगा? ‪

Author: Sandeep deo  

Published: April 24, 2015

Disclaimer: The opinions expressed within this article are the personal opinions of the author. Jagrit Bharat is not responsible for the accuracy, completeness, suitability, or validity of any information in this article. All information is provided on an as-is basis. The information, facts or opinions appearing in the article do not reflect the views of Jagrit Bharat and Jagrit Bharat does not assume any responsibility or liability for the same. 

comments